उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mayusiyon ko oDh ke sona paDa hamein

मायूसियों को ओढ़ के सोना पड़ा हमें

مایوسیوں کو اوڑھ کے سونا پڑا ہمیں

शायर: Tahira Jabeen Tara5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मायूसियों को ओढ़ के सोना पड़ा हमें
दिन को हँसे तो रात को रोना पड़ा हमें

वो जिस को ढूँडने में गुज़ारी तमाम 'उम्र
ये क्या सितम कि फिर उसे खोना पड़ा हमें

ये इख़्तियारी फ़ैसला था या कुछ और था
तुम से मिले तो फिर जुदा होना पड़ा हमें

वो एक नाम चाह से लिक्खा था बारहा
दिल से उसे फिर आँख से धोना पड़ा हमें

'तारा' किनारे आ लगी कश्ती जब एक दम
गिर्दाब में फिर आप को खोना पड़ा हमें