उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yahi sada mujhe aksar sunai deti hai

यही सदा मुझे अक्सर सुनाई देती है

یہی صدا مجھے اکثر سنائی دیتی ہے

शायर: Vala Jamal Al Aseeli8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

यही सदा मुझे अक्सर सुनाई देती है
सुकून किस को बुतों की ख़ुदाई देती है

वो आदमी जो हमेशा मिरे ख़िलाफ़ रहा
उसी की मुझ पे हुकूमत दिखाई देती है

मोहब्बतें ही सिखाती हैं हर सबक़ लेकिन
बहुत से दर्स हमें बेवफ़ाई देती है

ये उँगलियाँ ही क़लम बन के चलने लगती हैं
ये चश्म-ए-नम ही मुझे रौशनाई देती है

किसी के इश्क़ ने यूँ दिल को कर दिया रौशन
कि रौशनी सी हर इक सू दिखाई देती है

सुलूक एक सा करती नहीं है उल्फ़त भी
मिलन किसी को किसी को जुदाई देती है

नहीं है दूर मिरी रूह के क़रीब है वो
झलक उसी की तो मुझ में दिखाई देती है

न ऐसी दुनिया से उम्मीद ऐ 'विला' रखना
जो नेकियों के सिले में बुराई देती है