उर्दू शायरी · ग़ज़ल

is zindagi se koi shikayat nahin mujhe

इस ज़िंदगी से कोई शिकायत नहीं मुझे

اس زندگی سے کوئی شکایت نہیں مجھے

शायर: Vala Jamal Al Aseeli5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इस ज़िंदगी से कोई शिकायत नहीं मुझे
कहती हूँ सच कि झूट की आदत नहीं मुझे

हूँ सोते-जागते तिरे बारे में सोचती
कैसे कहूँ कि तेरी ज़रूरत नहीं मुझे

दिल दे दिया था पहली मुलाक़ात में तुझे
ये बात मानने में नदामत नहीं मुझे

आँखें सिवाए तेरे नहीं देखती हैं कुछ
इक पल तिरे ख़याल से फ़ुर्सत नहीं मुझे

मैं तो वफ़ा की दुनिया में रहती हूँ ऐ 'विला'
इक बेवफ़ा से कोई भी निस्बत नहीं मुझे