उर्दू शायरी · ग़ज़ल

us se mil kar hui maKHmur zuleKHa ki tarah

उस से मिल कर हुई मख़मूर ज़ुलेख़ा की तरह

اس سے مل کر ہوئی مخمور زلیخا کی طرح

शायर: Vala Jamal Al Aseeli7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उस से मिल कर हुई मख़मूर ज़ुलेख़ा की तरह
मैं भी हूँ 'इश्क़ में मसहूर ज़ुलेख़ा की तरह

मेरा आईन है ईसार किसी मीरा का
और बेबाकी है दस्तूर ज़ुलेख़ा की तरह

दुख तो इस का है मगर हूँ मैं बराबर की शरीक
दिल तो मेरा भी हुआ चूर ज़ुलेख़ा की तरह

'इश्क़ सच्चा हो मुक़द्दस हो तो मरता कब है
'इश्क़ में यूँ हूँ मैं मशहूर ज़ुलेख़ा की तरह

इस क़दर अश्क बहाए हैं तिरी फ़ुर्क़त में
हो गईं आँखें भी बे-नूर ज़ुलेख़ा की तरह

'इश्क़ का क्या भला हासिल है सिवाए इस के
होश से हो गई मैं दूर ज़ुलेख़ा की तरह

बस वही शख़्स 'विला' उस की मोहब्बत में मरे
जिस को रुस्वाई हो मंज़ूर ज़ुलेख़ा की तरह