उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yaadon ka dard dil mein hai kuchh yun ubhaar par

यादों का दर्द दिल में है कुछ यूँ उभार पर

یادوں کا درد دل میں ہے کچھ یوں ابھار پر

शायर: Chander Wahid5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

यादों का दर्द दिल में है कुछ यूँ उभार पर
जैसे उगा हूँ नन्हा सा पौदा मज़ार पर

पलकों पे उन की ठहरे हैं आँसू कुछ इस तरह
आ बैठें जैसे ज़ख़्मी परिंदे द्वार पर

दुख दर्द नईं आह मुझे फिर से थाम लो
कहते हैं मुझ से लोग कि मैं हूँ उतार पर

अब चाहे जैसे खेले हमारे नसीब से
हम ने तो छोड़ा फ़ैसला परवरदिगार पर

होंगे नहीं फ़ज़ाओं में 'वाहिद' के गीत अब
सर रख के सो गया है वो टूटे सितार पर