उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ab to KHwabon ke hi sahaare hain

अब तो ख़्वाबों के ही सहारे हैं

اب تو خوابوں کے ہی سہارے ہیں

शायर: Chander Wahid5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अब तो ख़्वाबों के ही सहारे हैं
ये ही ले दे के अब हमारे हैं

अपना साया तलक न था अपना
हम ने ऐसे भी दिन गुज़ारे हैं

ख़ुद को ख़्वाबों के मोल बेचा है
क़र्ज़ यादों के तब उतारे हैं

अपना कहने को यूँ तो दुनिया है
हम अज़ल से ही बे-सहारे हैं

दर्द की छाँव में चलो 'वाहिद'
तपते मौसम के ये इशारे हैं