उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yaad mein teri aisa karne lagte hain

याद में तेरी ऐसा करने लगते हैं

یاد میں تیری ایسا کرنے لگتے ہیں

शायर: Gaurav Trivedi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

याद में तेरी ऐसा करने लगते हैं
हम अक्सर ख़ुद से ही लड़ने लगते हैं

यादें ज़िंदा हो जाती हैं शाम ढले
फिर हम धीरे-धीरे मरने लगते हैं

कुछ यादें इतनी धुंदली हो जाती हैं
हम उन को इक ख़्वाब समझने लगते हैं

वो क़िस्सा मैं जब जब भी दोहराता हूँ
नज़रों से कुछ लोग उतरने लगते हैं

बूढ़े हो कर मुखिया अपने घर में ही
अपनी औलादों से डरने लगते हैं