उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ji bhi chuke hain KHwab jo ab dekhte hain hum

जी भी चुके हैं ख़्वाब जो अब देखते हैं हम

جی بھی چکے ہیں خواب جو اب دیکھتے ہیں ہم

शायर: Gaurav Trivedi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जी भी चुके हैं ख़्वाब जो अब देखते हैं हम
कुछ इक बरस तो साथ भी उस के रहे हैं हम

वो ग़ैर की हुई ये चलो मान भी लिया
आता नहीं यक़ीं कि किसी और के हैं हम

हम को न देख आज तुझे ये ख़बर नहीं
कल तक थे कोई आज कोई दूसरे हैं हम

सोचा करें हैं लौट चलें उस के शहर को
ढूँढा करें कि कौन जगह खो गए हैं हम

ग़ज़लें पढ़ो तो हाल हमारा पता चले
अच्छे हैं पूछने पे यही बोलते हैं हम