उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wusat-e-daman-e-sahra aur qamar ki raushni

वुस'अत-ए-दामान-ए-सहरा और क़मर की रौशनी

وسعت دامان سحرا اور قمر کی روشنی

शायर: Aaditya Aab3 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वुस'अत-ए-दामान-ए-सहरा और क़मर की रौशनी
मेरी आँखें खा गई हैं उस नगर की रौशनी

देख कर तुझ को बढ़ेंगी हुस्न की हैरानियाँ
धुँद की सूरत में होती है सहर की रौशनी

अब ज़ियादा क्या निभा पाएगा कोई साथ 'आब'
मैं इधर की रौशनी हूँ वो उधर की रौशनी