उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kitne din ke baad milta hai sukun dekhenge hum

कितने दिन के बा'द मिलता है सुकूँ देखेंगे हम

کتنے دن کے بعد ملتا ہے سکوں دیکھیں گے ہم

शायर: Aaditya Aab4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कितने दिन के बा'द मिलता है सुकूँ देखेंगे हम
दिल के सब्ज़ा-ज़ार में कब तक भला नाचेंगे ग़म

इक नदी हम को बहा ले जाएगी उस पार तक
एक धुन कर देगी सारे सुर हमारे ताल सम

इक दिया रौशन किए जाता है मेरे हुस्न को
एक आईना है जिस में ढल रहा हूँ दम-ब-दम

ओस की शाइस्ता बातों से कहाँ बहलेगा दिल
'आब' पर बजने दो अब के तार सप्तक की रिदम