उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tir ho kar uThaya kamanon ka bojh

तीर हो कर उठाया कमानों का बोझ

تیر ہو کر اٹھایا کمانوں کا بوجھ

शायर: Aaditya Aab5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तीर हो कर उठाया कमानों का बोझ
सर पे रख कर जिए दो-जहानों का बोझ

सुनने वालों पे रक्खा ज़बानों का बोझ
कहने वालों पे डाला है कानों का बोझ

आसमाँ के बदन पर है तारा ज़मीं
और ज़मीं पर है कितनी चटानों का बोझ

सारी दुनिया हमारी है दुनिया के हम
हम पे मत डालिए ख़ुश-गुमानों का बोझ

दर नहीं कर सको तो दरीचा सही
कुछ ज़रा कम तो हो क़ैद-ख़ानों का बोझ