उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wo tasawwur mein to aata hai chala jata hai

वो तसव्वुर में तो आता है चला जाता है

وہ تصور میں تو آتا ہے چلا جاتا ہے

शायर: Aalam Nizami7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वो तसव्वुर में तो आता है चला जाता है
धड़कनें दिल की बढ़ाता है चला जाता है

होने लगता है मुझे जब भी तकब्बुर का गुमाँ
कोई आईना दिखाता है चला जाता है

कोई दरवेश मुझे रोज़ सवाली बन कर
ख़्वाब-ए-ग़फ़लत से जगाता है चला जाता है

कौन है दोस्त यहाँ कौन हमारा दुश्मन
गर्दिश-ए-वक़्त बताता है चला जाता है

मेरी तुर्बत पे सर-ए-शाम दु'आओं का चराग़
कोई अश्कों से जलाता है चला जाता है

बैठ जाता हूँ रह-ए-'इश्क़ में थक कर तो जुनूँ
मंज़िल-ए-शौक़ बढ़ाता है चला जाता है

वक़्त आता है दबे पाँव हमेशा 'आलम'
सब की औक़ात बताता है चला जाता है