उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wo shor tha ki lafz nahin hai zaban par

वो शोर था कि लफ़्ज़ नहीं है ज़बान पर

وہ شور تھا کہ لفظ نہیں ہے زبان پر

शायर: Daniyal Zaman5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वो शोर था कि लफ़्ज़ नहीं है ज़बान पर
आवाज़ क़त्ल होने लगी हर्फ़-दान पर

मैं हालत-ए-ख़मीर में सब देखता रहा
क्या क्या गुज़र रहा था मिरी एक जान पर

जंगल में इस लिए हैं शिकारी छुपे हुए
बैठा हुआ है कोई दरिंदा मचान पर

खुलने में थोड़ी देर लगेगी ये राज़ भी
खद्दर लपेट बैठा हूँ रेशम के थान पर

इक शक्ल आइने की सवारी पे लाद ली
इक शख़्स को सवार किया अपने ध्यान पर