उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wo sard fasla bas aaj kaTne wala tha

वो सर्द फ़ासला बस आज कटने वाला था

وہ سرد فاصلہ بس آج کٹنے والا تھا

शायर: Kaifi Wijdani7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वो सर्द फ़ासला बस आज कटने वाला था
मैं इक चराग़ की लौ से लिपटने वाला था

बहुत बिखेरा मुझे मेरे मेहरबानों ने
मिरा वजूद ही लेकिन सिमटने वाला था

बचा लिया तिरी ख़ुश्बू के फ़र्क़ ने वर्ना
मैं तेरे वहम में तुझ से लिपटने वाला था

उसी को चूमता रहता था वो कि उस को भी
'अज़ीज़ था वही बाज़ू जो कटने वाला था

मुझी को राह बदलनी थी सो बदल डाली
कहीं पहाड़ भी ठोकर से हटने वाला था

तलाश जिस की थी वो हर्फ़ मिल गया वर्ना
मैं एक सादा वरक़ और उलटने वाला था

ये किस को तीर चलाने का शौक़ जाग उठा
वो बाज़ मेरी तरफ़ ही झपटने वाला था