उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHud hi uchhaalun patthar KHud hi sar par le lun

ख़ुद ही उछालूँ पत्थर ख़ुद ही सर पर ले लूँ

خود ہی اچھالوں پتھر خود ہی سر پر لے لوں

शायर: Kaifi Wijdani6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़ुद ही उछालूँ पत्थर ख़ुद ही सर पर ले लूँ
जब चाहूँ सूने मौसम से मंज़र ले लूँ

आईने से मेरा क़ातिल मुझ को पुकारे
लाओ मैं भी अपने हाथों पत्थर ले लूँ

जिन रस्तों ने जान ओ दिल पर ज़ख़्म सजाए
उन रस्तों से पूजने वाले पत्थर ले लूँ

मैं शंकर से ज़हर का प्याला छीन के पी लूँ
लहजे के इस कर्ब में सारे मंज़र ले लूँ

मुझ से कहे तो अपने दिल की बात वो ज़ालिम
उस के दिल का बोझ मैं अपने सर पर ले लूँ

कुछ ले दे कर बात बना लूँ अपनी 'कैफ़ी'
कुछ दुनिया को हँस कर दूँ कुछ रो कर ले लूँ