उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wo aaj lauT bhi aae to is se kya hoga

वो आज लौट भी आए तो इस से क्या होगा

وہ آج لوٹ بھی آئے تو اس سے کیا ہوگا

शायर: Kaifi Wijdani6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वो आज लौट भी आए तो इस से क्या होगा
अब उस निगाह का पत्थर से सामना होगा

ज़मीं के ज़ख़्म समुंदर तो भर न पाएगा
ये काम दीदा-ए-तर तुझ को सौंपना होगा

हज़ार नेज़े उधर और मैं इधर तन्हा
मिरी शिकस्त का उनवाँ ही दूसरा होगा

जो तेज़ धूप में सायों की फ़स्ल बोते हैं
यहाँ की आब ओ हवा का उन्हें पता होगा

मैं और एक क़दम उस की सम्त बढ़ जाता
पता न था कि वो इतना गुरेज़-पा होगा

मिरा यक़ीं है कि राह-ए-वफ़ा में मेरे ब'अद
मिरा सफ़र तिरे क़दमों ने तय किया होगा