उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tu ek qadam bhi jo meri taraf baDha deta

तू इक क़दम भी जो मेरी तरफ़ बढ़ा देता

تو اک قدم بھی جو میری طرف بڑھا دیتا

शायर: Kaifi Wijdani6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तू इक क़दम भी जो मेरी तरफ़ बढ़ा देता
मैं मंज़िलें तिरी दहलीज़ से मिला देता

ख़बर तो देता मुझे मुझ को छोड़ जाने की
मैं वापसी का तुझे रास्ता बता देता

मुझे तो रहना था आख़िर हद-ए-तअ'य्युन में
वो पास आता तो मैं फ़ासला बढ़ा देता

हम एक थे तो हमें बे-सदा ही रहना था
पुकारता वो किसे मैं किसे सदा देता

वो ख़्वाब देख रही थीं ये जागती आँखें
चराग़ ख़ुद नहीं बुझता तो मैं बुझा देता

हवा के रुख़ पे मिरा गाँव ही न था वर्ना
जो मुट्ठियों में भरी थी वो ख़ाक उड़ा देता