उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wo kitni der khaDa sochta raha mujhko

वो कितनी देर खड़ा सोचता रहा मुझ को

وہ کتنی دیر کھڑا سوچتا رہا مجھ کو

शायर: Danish Naqwi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वो कितनी देर खड़ा सोचता रहा मुझ को
गले लगा तो पता भी नहीं चला मुझ को

न जाने मैं तेरे पहलू में कैसे बैठ गया
मिरी जगह ही नहीं है अभी उठा मुझ को

तिरे ख़याल से बढ़ कर है ख़ाली-पन मेरा
कहाँ कहाँ से भरेगा तिरा ख़ला मुझ को

वो मेरे सामने तौहीन कर गया मेरी
और इस पे ये कि बुरा भी नहीं लगा मुझ को

मैं पहली बार हूँ ज़ेर-ए-मुताला 'दानिश'
अभी कहीं पे निशाँ तक नहीं लगा मुझ को