उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aawaz ki duri pe khaDa soch raha hun

आवाज़ की दूरी पे खड़ा सोच रहा हूँ

آواز کی دوری پہ کھڑا سوچ رہا ہوں

शायर: Danish Naqwi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आवाज़ की दूरी पे खड़ा सोच रहा हूँ
अब कौन मुझे देगा सदा सोच रहा हूँ

छोटी सी नज़र आती है अतराफ़ की हर शय
इस वक़्त मैं कुछ इतना बड़ा सोच रहा हूँ

क्या सोचना था मुझ को तिरे बारे में लेकिन
अफ़्सोस तिरे बारे में क्या सोच रहा हूँ

तू ने तो मिरे बारे में सोचा भी नहीं है
मैं फिर भी कोई अच्छा बुरा सोच रहा हूँ

जिस दिन से उठीं मुझ पे तिरी सब्ज़ सी आँखें
मैं पेड़ नहीं फिर भी हरा सोच रहा हूँ

नुक़सान बहुत से थे गए साल के 'दानिश'
लेकिन तिरे बारे में बड़ा सोच रहा हूँ