उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nazar to aaya magar ja-ba-ja nahin aaya

नज़र तो आया मगर जा-ब-जा नहीं आया

نظر تو آیا مگر جا بجا نہیں آیا

शायर: Danish Naqwi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नज़र तो आया मगर जा-ब-जा नहीं आया
ज़मीं पे आदमी जैसा ख़ुदा नहीं आया

बहाव लाया है उस को किनारे की जानिब
वो शख़्स मेरी तरफ़ तैरता नहीं आया

इक और बार बिछड़ कर न देख लें दोनों
ये ज़ख़्म अब भी हमें एक सा नहीं आया

हज़ार कोशिशें कर लीं ज़माने भर ने मगर
मिरी नज़र से उसे देखना नहीं आया

हमारा हक़ ही नहीं है कि अब दुहाई दें
गए हुओं को अगर रोकना नहीं आया

बराबरी का तसव्वुर नहीं हमारी तरफ़
हमारे जैसा कोई दूसरा नहीं आया