उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wo kahte hain ki aankhon mein meri taswir kis ki hai

वो कहते हैं कि आँखों में मिरी तस्वीर किस की है

وہ کہتے ہیں کہ آنکھوں میں مری تصویر کس کی ہے

शायर: Iftikhar Raghib9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वो कहते हैं कि आँखों में मिरी तस्वीर किस की है
मैं कहता हूँ कि रौशन इस क़दर तक़दीर किस की है

वो कहते हैं कि किस ने आप को रोका है जाने से
मैं कहता हूँ कि मेरे पाँव में ज़ंजीर किस की है

वो कहते हैं कि है इंसान तो इक ख़ाक का पुतला
मैं कहता हूँ कि इतनी अज़्मत-ओ-तौक़ीर किस की है

वो कहते हैं कि दिल में आप ने किस को बसाया है
मैं कहता हूँ कि ये दुनिया-ए-दिल जागीर किस की है

वो कहते हैं कि किस ने जा-ब-जा लिख्खा है मेरा नाम
मैं कहता हूँ शिकस्ता इस क़दर तहरीर किस की है

वो कहते हैं कि मैं ने आप सा सामे नहीं देखा
मैं कहता हूँ कि इतनी पुर-कशिश तक़रीर किस की है

वो कहते हैं तिरे शेरों में है शोख़ी क़यामत की
मैं कहता हूँ ख़याल ओ फ़िक्र में तनवीर किस की है

वो कहते हैं कि हम हैं दुश्मनान-ए-अम्न के दुश्मन
मैं कहता हूँ कि उन के हाथ में शमशीर किस की है

वो कहते हैं कि 'राग़िब' तुम नहीं रखते ख़याल अपना
मैं कहता हूँ कि हर दम फ़िक्र दामन-गीर किस की है