उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wo kabhi mail-e-wafa na hua

वो कभी माइल-ए-वफ़ा न हुआ

وہ کبھی مائل وفا نہ ہوا

शायर: Nadir Shahjahanpuri7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वो कभी माइल-ए-वफ़ा न हुआ
मेरा चाहा हुआ बुरा न हुआ

मर गए वस्ल-ए-दिल-रुबा न हुआ
मुद्दआ' हस्ब-ए-मुद्दआ न हुआ

उस से मज़मूँ बँधा न चोटी का
ज़ुल्फ़-ए-जानाँ पे जो फ़िदा न हुआ

क़ैद-ए-मर्क़द मिली पस-ए-मुर्दन
जान दे कर भी में रिहा न हुआ

तू ने यारब ज़बाँ तो दी मुझ को
शुक्र तेरा मगर अदा न हुआ

दम निकलता बुतों पे क्या लेकिन
ये भी इक मौत का बहाना हुआ

फ़ैज़-ए-'इशरत' से अब तू ऐ 'नादिर'
में भी इक शाएर-ए-यगाना हुआ