उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wo jo kuchh kuchh nigah milane lage

वो जो कुछ कुछ निगह मिलाने लगे

وہ جو کچھ کچھ نگہ ملانے لگے

शायर: Zaheer Dehlvi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वो जो कुछ कुछ निगह मिलाने लगे
हम हर इक से नज़र चुराने लगे

देखिए क्या हो जौर का अंजाम
वो मिरे हौसले बढ़ाने लगे

ये वो काफ़िर है इश्क़-ए-ख़ाना-ख़राब
तुम मिरे ग़म-कदे में आने लगे

काविशों में भी अब मज़ा न रहा
हर किसी को वो जब सताने लगे

मौत आई 'ज़हीर' कब हम को
जब मोहब्बत के लुत्फ़ आने लगे