उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wo har maqam se pahle wo har maqam ke baad

वो हर मक़ाम से पहले वो हर मक़ाम के बा'द

وہ ہر مقام سے پہلے وہ ہر مقام کے بعد

शायर: Qabil Ajmeri8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वो हर मक़ाम से पहले वो हर मक़ाम के बा'द
सहर थी शाम से पहले सहर है शाम के बा'द

हर इंक़िलाब मुबारक हर इंक़िलाब अज़ाब
शिकस्त-ए-जाम से पहले शिकस्त-ए-जाम के बा'द

मुझी पे इतनी तवज्जोह मुझी से इतना गुरेज़
मिरे सलाम से पहले मिरे सलाम के बा'द

चराग़-ए-बज़्म-ए-सितम हैं हमारा हाल न पूछ
जले थे शाम से पहले बुझे हैं शाम के बा'द

ये रात कुछ भी नहीं थी ये रात सब कुछ है
तुलू-ए-जाम से पहले तुलू-ए-जाम के बा'द

वही ज़बाँ वही बातें मगर है कितना फ़र्क़
तुम्हारे नाम से पहले तुम्हारे नाम के बा'द

हयात गिर्या-ए-शबनम हयात रक़्स-ए-शरर
तिरे पयाम से पहले तिरे पयाम के बा'द

ये तर्ज़-ए-फ़िक्र ये रंग-ए-सुख़न कहाँ 'क़ाबिल'
तिरे कलाम से पहले तिरे कलाम के बा'द