उर्दू शायरी · ग़ज़ल

din chhupa aur gham ke sae Dhale

दिन छुपा और ग़म के साए ढले

دن چھپا اور غم کے سائے ڈھلے

शायर: Qabil Ajmeri6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिन छुपा और ग़म के साए ढले
आरज़ू के नए चराग़ जले

हम बदलते हैं रुख़ हवाओं का
आए दुनिया हमारे साथ चले

लब पे हिचकी भी है तबस्सुम भी
जाने हम किस से मिल रहे हैं गले

दिल के इन हौसलों का हाल न पूछ
जो तिरे दामन-ए-करम में पले

कौन याद आ गया अज़ाँ के वक़्त
बुझता जाता है दिल चराग़ जले

मस्लहत सर-निगूँ ख़िरद ख़ामोश
इश्क़ के आगे किस की दाल गले