उर्दू शायरी · ग़ज़ल

waqt ki rau ko rawani se nikala jae

वक़्त की रौ को रवानी से निकाला जाए

وقت کی رو کو روانی سے نکالا جائے

शायर: Faisal Tufail5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वक़्त की रौ को रवानी से निकाला जाए
चंद लम्हों को गिरानी से निकाला जाए

मुझ को तो खींच लिया दस्त-ए-जुनूँ ने लेकिन
अब मिरा 'अक्स भी पानी से निकाला जाए

मुद्दतों उस की रक़ाबत को सहा है हम ने
अब ये किरदार कहानी से निकाला जाए

ज़हर-आलूद हुई जाती है ख़ुशबू इस से
साँप को रात की रानी से निकाला जाए

फिर हुआ लश्कर-ए-फ़िर'औन मुक़ाबिल 'फ़ैसल'
रास्ता फिर कोई पानी ने निकाला जाए