उर्दू शायरी · ग़ज़ल

waqt jab tai hai to phir gham kaisa

वक़्त जब तय है तो फिर ग़म कैसा

وقت جب طے ہے تو پھر غم کیسا

शायर: Raakesh ulfat5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वक़्त जब तय है तो फिर ग़म कैसा
आप ज़िंदा हैं तो मातम कैसा

गर्म-ओ-सर्द एक ही रुत जैसे हैं
अब हमारे लिए मौसम कैसा

आप को देख के ये जाना है
ख़्वाब लगता है मुजस्सम कैसा

आसमानों पे कमंदें डालो
ठान ली जाए तो जोखम कैसा

कोशिशें छोड़ दे ऐ चारागर
ज़ख़्म नासूर है मरहम कैसा