उर्दू शायरी · ग़ज़ल

waise tum achchhi laDki ho

वैसे तुम अच्छी लड़की हो

ویسے تم اچھی لڑکی ہو

शायर: Kaami Shah9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वैसे तुम अच्छी लड़की हो
लेकिन मेरी क्या लगती हो

मैं अपने दिल की कहता हूँ
तुम अपने दिल की सुनती हो

झीलों जैसी आँखों वाली
तुम बेहद गहरी लगती हो

मौज-ए-बदन में रंग हैं इतने
लगता है रंगों से बनती हो

फूल हुए हैं ऐसे रौशन
जैसे इन में तुम हँसती हो

जंगल हैं और बाग़ हैं मुझ में
तुम इन से मिलती-जुलती हो

यूँ तो बशर-ज़ादी हो लेकिन
ख़ुशबू जैसी क्यूँ लगती हो

अक्सर सोचता रहता हूँ मैं
ख़ल्वत में तुम क्या करती हो

वो क़र्या आबाद हमेशा
जिस क़र्ये में तुम रहती हो