उर्दू शायरी · ग़ज़ल

agar kar-e-mohabbat mein mohabbat ras aa jati

अगर कार-ए-मोहब्बत में मोहब्बत रास आ जाती

اگر کار محبت میں محبت راس آ جاتی

शायर: Kaami Shah5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अगर कार-ए-मोहब्बत में मोहब्बत रास आ जाती
तुम्हारा हिज्र अच्छा था जो वसलत रास आ जाती

गला फाड़ा नहीं करते रफ़ू दरयाफ़्त करने में
अगर बेकार रहने की मशक़्क़त रास आ जाती

तुम्हें सय्याद कहने से अगर हम बाज़ आ जाते
हमें भी इस तमाशे में सुकूनत रास आ जाती

फ़क़त ग़ुस्सा पिए जाते हैं रोज़ ओ शब के झगड़े में
कोई हंगामा कर सकते जो वहशत रास आ जाती

अगर हम पार कर सकते ये अपनी ज़ात का सहरा
तो अपने साथ रहने की सहूलत रास आ जाती