उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek nae masale se nikle hain

इक नए मसअले से निकले हैं

اک نئے مسئلے سے نکلے ہیں

शायर: Kaami Shah4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इक नए मसअले से निकले हैं
ये जो कुछ रास्ते से निकले हैं

काग़ज़ी हैं ये जितने पैराहन
एक ही सिलसिले से निकले हैं

ले उड़ा है तिरा ख़याल हमें
और हम क़ाफ़िले से निकले हैं

याद रहते हैं अब जो काम हमें
ये उसे भूलने से निकले हैं