उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wahi ek baat jo aai gai hai

वही इक बात जो आई गई है

وہی اک بات جو آئی گئی ہے

शायर: Tahir Azeem5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वही इक बात जो आई गई है
बहुत तकलीफ़ पहुँचाई गई है

नज़र अब भी है महरूम-ए-नज़ारा
मगर तस्वीर दिखलाई गई है

तो क्या दुनिया यहाँ पहले नहीं थी
तो क्या दुनिया यहाँ लाई गई है

हम ऐसे शक्ल ही पाते न होंगे
तभी तो ख़ाक पहनाई गई है

ज़रूरी तो नहीं वो बात सच हो
हमें जो बात पहुँचाई गई है