उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wahi dimagh mein dil mein nazar mein rahta hai

वही दिमाग़ में दिल में नज़र में रहता है

وہی دماغ میں دل میں نظر میں رہتا ہے

शायर: Obaidur Rahman6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वही दिमाग़ में दिल में नज़र में रहता है
चराग़ बन के हर इक रहगुज़र में रहता है

न जाने कौन सा पल दूर कर दे मंज़िल से
ये एक ख़ौफ़ हमेशा सफ़र में रहता है

उसी को आग लगाने का फ़न भी आता है
बुझा के आग जो अक्सर ख़बर में रहता है

उसी से राह खुली है नजात की अक्सर
वो एक ख़ैर का पहलू जो शर में रहता है

न जाने कैसी ये बे-ताबियाँ हैं साथ मिरे
सुकूँ सफ़र में न अब मुस्तक़र में रहता है

उसी से राहत-ए-जाँ है सुकून-ए-दिल भी 'उबैद'
ख़याल-ओ-ख़्वाब की सूरत जो घर में रहता है