उर्दू शायरी · ग़ज़ल

chehre ko wo jo apne aKHbar kar raha hai

चेहरे को वो जो अपने अख़बार कर रहा है

چہرے کو وہ جو اپنے اخبار کر رہا ہے

शायर: Obaidur Rahman7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

चेहरे को वो जो अपने अख़बार कर रहा है
इज़हार अपने ग़म का बे-कार कर रहा है

हर मरहला वो गोया दुश्वार कर रहा है
जो वापसी पे हम को तय्यार कर रहा है

बच्चों की ख़्वाहिशें हैं और मेरा तंग दामन
सामान मेरे दुख का तेहवार कर रहा है

मंज़िल की जब तमन्ना दम तोड़ने लगी है
तब मेरा रास्ता वो हमवार कर रहा है

जीवन हमारा यारो इक नाव काग़ज़ी है
लेकिन समुंदरों को ये पार कर रहा है

फिर क़ुर्बतों की ख़्वाहिश पलटेगी चोट खा कर
अपनी अना को फिर वो दीवार कर रहा है

हम ग़म से पा के फ़ुर्सत मरक़द में चैन से अब
हर दिन 'उबैद' अपना इतवार कर रहा है