उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wafur-e-sher hai aur raat hone wali hai

वफ़ूर-ए-शेर है और रात होने वाली है

وفور شعر ہے اور رات ہونے والی ہے

शायर: Idris Azad9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वफ़ूर-ए-शेर है और रात होने वाली है
तू चाँद है तो मुलाक़ात होने वाली है

तुम्हारी बात ने दिल की घटा को छेड़ दिया
हमारी आँखों से बरसात होने वाली है

ये एक साथ जो ख़ामोश हो गए हैं लोग
ज़रूर कोई बड़ी बात होने वाली है

हर एक शख़्स ही तेशा उठाए फिरता है
बुतों की शहर में बोहतात होने वाली है

वो अपनी आँखों में आयात लिख के लाया है
इस अजनबी से मुझे मात होने वाली है

मैं जानता हूँ हक़ीक़त सवाँग-ए-महशर की
ये दिल-लगी भी मिरे साथ होने वाली है

वो कार-ए-इश्क़ में भी कामयाब हो गया है
अब उस को लम्बी हवालात होने वाली है

हमारे ज़ब्त की पुख़्ता-रवी से लगता है
कुछ और तल्ख़ी-ए-औक़ात होने वाली है

सफ़र तो होगा मगर रास्ते नहीं होंगे
अजीब सूरत-ए-हालात होने वाली है