उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aap to baat ka aKHbar bana dete hain

आप तो बात का अख़बार बना देते हैं

آپ تو بات کا اخبار بنا دیتے ہیں

शायर: Idris Azad10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आप तो बात का अख़बार बना देते हैं
घर का माहौल पुर-असरार बना देते हैं

बाज़ आँखों को तकल्लुम भी अता होता है
अपनी ख़ामोशी को इज़हार बना देते हैं

अब शिकायत न करो आप ने जो दर्द दिए
हम को पीने का रवादार बना देते हैं

हुस्न-ए-मुत्लक़ तुझे मालूम कहाँ लज़्ज़त-ए-दीद
आ तुझे तालिब-ए-दीदार बना देते हैं

आप की जुम्बिश-ए-अबरू ये इशारे ये किनाए
बात को और मज़ेदार बना देते हैं

ऐसे अहकाम भी तकवीन की साआ'त में हैं
जो फ़रिश्तों को ख़ता-कार बना देते हैं

हम भी आज़र हैं अगर आप हैं पत्थर की चटान
आईये आप को शहकार बना देते हैं

मैं कहाँ तुम से मिला रात कहाँ चाँदनी थी
यूँही बस बात मिरे यार बना देते हैं

देख कर लौह-ए-लहद दिल में ख़याल आता है
सर बनाते नहीं दस्तार बना देते हैं

हम ने देखा है करिश्मा ये तिरे आहन-गर
पल में ज़ंजीर को तलवार बना देते हैं