उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ab to asbab-o-ilal se mujhe bartar kar de

अब तो अस्बाब-ओ-इलल से मुझे बरतर कर दे

اب تو اسباب و علل سے مجھے برتر کر دے

शायर: Idris Azad6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अब तो अस्बाब-ओ-इलल से मुझे बरतर कर दे
इस फरीज़े पे फ़रिश्तों को मुक़र्रर कर दे

खींच कर हुस्न के अंदाम से ज़र-बफ़्त लिबास
मय्यत-ए-इश्क़ की उर्यानी पे चादर कर दे

उस को मिल जाए मिरी ज़ात की तख़्लीक़ का लुत्फ़
मेरे पार्स के लिए तू मुझे पत्थर कर दे

ख़ुद से आया न गया हम को बुलाया सर-ए-अर्श
इस पे दा'वा कि ग़म-ए-इश्क़ में महशर कर दे

या तसलसुल से निकल कर रुख़-ए-तस्वीर में आ
या मीरी ज़ात को तस्वीर से बाहर कर दे

वो जफ़ा-पेशा न कर पाएगा सर तूर-ए-वजूद
मशवरा है कि इरादे को मुअख़्ख़र कर दे