उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wafa ke dawon pe hans raha tha

वफ़ा के दा'वों पे हँस रहा था

وفا کے دعووں پہ ہنس رہا تھا

शायर: Aal-e-Umar9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वफ़ा के दा'वों पे हँस रहा था
मुझे नया हिज्र हो गया था

बहुत ही बद-शक्ल निकली दुनिया
मैं पहले पर्दे पे देखता था

उसे बताता था मेरी बातें
ख़ुदा मिरी काल सुन रहा था

समझ में क्या आता मेरा लहजा
किसी की बातों में आ गया था

उतार फेंकी थी शाम सर से
अभी तो पारा नहीं चढ़ा था

तुम आज तक रो रहे हो जो ग़म
वो दो दिनों से ज़ियादा का था

ग़रीब बेवा का हाथ थामा
मदीने जाने का रास्ता था

और उस की हरयानवी ज़बाँ थी
और उस के हाथों में इक घड़ा था

ये जुमला जो पहले कह दिया है
ये वस्ल के ऐन बाद का था