उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek to use har baat mein had chahiye meri

इक तो उसे हर बात में हद चाहिए मेरी

اک تو اسے ہر بات میں حد چاہیے میری

शायर: Aal-e-Umar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इक तो उसे हर बात में हद चाहिए मेरी
फिर उस पे मोहब्बत भी अशद चाहिए मेरी

पहले उसे दरकार थी शाम और ये शाना
अब मुझ को भुलाने में मदद चाहिए मेरी

बू आने लगी तुझ से भी दुनिया की मिरे यार
कुछ रोज़ मुझे सोहबत-ए-बद चाहिए मेरी

कहती है फ़रिश्तों की तरह टोकूँ न रोकूँ
और आदमी वाली भी सनद चाहिए मेरी

क्या दिन में ज़रूरी है कि औरों में रहो तुम
क्या रात में बस निय्यत-ए-बद चाहिए मेरी