उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wafa kar raha hun jafa chahta hun

वफ़ा कर रहा हूँ जफ़ा चाहता हूँ

وفا کر رہا ہوں جفا چاہتا ہوں

शायर: Urooj Qadri8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वफ़ा कर रहा हूँ जफ़ा चाहता हूँ
ख़ता कर रहा हूँ सज़ा चाहता हूँ

मोहब्बत का ये भी कोई मरहला है
कि मैं नाला-ए-ना-रसा चाहता हूँ

निगाहों की इफ़्फ़त दिलों की तहारत
मैं सर से क़दम तक हया चाहता हूँ

तरद्दुद तवहहुम की ज़ुल्मत मिटा कर
मैं ईल्म-ओ-यकीं की ज़िया चाहता हूँ

मैं अख़लाक़-ओ-किरदार-ओ-रूहानियत में
तनज़्ज़ुल नहीं इर्तिक़ा चाहता हूँ

ख़ुदा की शरीअ'त हो नाफ़िज़ ज़मीं पर
मैं इंसानियत की बक़ा चाहता हूँ

है जन्नत तो तेरी रज़ा की अलामत
इलाही मैं तेरी रज़ा चाहता हूँ

'उरूज' उन का पैग़ाम पहुँचा तो मुझ तक
मगर मैं कुछ इस से सिवा चाहता हूँ