उर्दू शायरी · ग़ज़ल

uTho ab der hoti hai wahan chal kar sanwar jaana

उठो अब देर होती है वहाँ चल कर सँवर जाना

اٹھو اب دیر ہوتی ہے وہاں چل کر سنور جانا

शायर: Hafeez Jalandhari6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उठो अब देर होती है वहाँ चल कर सँवर जाना
यक़ीनी है घड़ी दो में मरीज़-ए-ग़म का मर जाना

मुझे डर है गुलों के बोझ से मरक़द न दब जाए
उन्हें आदत है जब आना ज़रूर एहसान धर जाना

हबाब आ सामने सब वलवले जोश-ए-जवानी के
ग़ज़ब था क़ुल्ज़ुम-ए-उम्मीद का चढ़ कर उतर जाना

यहाँ जुज़ कश्ती-ए-मौज-ए-बला कुछ भी न पाओगे
इसी के आसरे दरिया-ए-हस्ती से उतर जाना

मबादा फिर असीर-ए-दाम-ए-अक़्ल-ओ-होश हो जाऊँ
जुनूँ का इस तरह अच्छा नहीं हद से गुज़र जाना

'हफ़ीज़' आग़ाज़ से अंजाम तक रहज़न ने पहुँचाया
उसी को हम-सफ़र पाया उसी को हम-सफ़र जाना