उर्दू शायरी · ग़ज़ल

usne dekha tha ajab ek tamasha mujh mein

उस ने देखा था अजब एक तमाशा मुझ में

اس نے دیکھا تھا عجب ایک تماشا مجھ میں

शायर: Ejaz Obaid5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उस ने देखा था अजब एक तमाशा मुझ में
मैं जो रोया तो कोई हँसता रहा था मुझ में

मेरी आँखों से ख़बर जान न ली हो उस ने
कोई बादल था बहुत टूट के बरसा मुझ में

झाँकने से मिरी आँखों में सभी डरने लगे
जब से उतरा है कोई आईना-ख़ाना मुझ में

क्या हुआ था मुझे क्यूँ सोचता था उस के ख़िलाफ़
वर्ना उस को था अजब एक अक़ीदा मुझ में

साथ साथ उस के मैं ख़ुद रोता रहा था उस शाम मगर
उस को देता जो दिलासा वो नहीं था मुझ में