उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dikhata kya hai ye TuTi hui kaman mujhe

दिखाता क्या है ये टूटी हुई कमान मुझे

دکھاتا کیا ہے یہ ٹوٹی ہوئی کمان مجھے

शायर: Ejaz Obaid6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिखाता क्या है ये टूटी हुई कमान मुझे
तिरा शिकार हूँ अच्छी तरह से जान मुझे

हवा ने रेत की सूरत ज़मीं पे लिख दी है
दिखाई देती है पत्थर की दास्तान मुझे

इक आसमाँ ने ज़मीं पर गिरा दिया लेकिन
ज़मीं ने फिर से बना डाला आसमान मुझे

मैं इस हवा का नहीं पानियों का क़ैदी हूँ
न जाने क्यूँ लिए फिरता है बादबान मुझे

ज़मीं से सिर्फ़ जज़ीरा दिखाई देता है
कोई न जान सका आज तक चटान मुझे

न जाने तीर की मानिंद कैसे चुभने लगा
वो शख़्स लगता था टूटी हुई कमान मुझे