उर्दू शायरी · ग़ज़ल

usne aise kaha shukriya mohtaram

उस ने ऐसे कहा शुक्रिया मोहतरम

اس نے ایسے کہا شکریہ محترم

शायर: Yasir Raza Asif7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उस ने ऐसे कहा शुक्रिया मोहतरम
मैं भी ख़ुद को समझने लगा मोहतरम

मुझ से मिलते हुए आम सा वो लगा
ज़िक्र तेरा किया और हुआ मोहतरम

शाह का हाथ हम को ये समझा गया
बुझ के होता है कैसे दिया मोहतरम

राह पूछी है हम को बता दीजिए
हम ने माँगा है कब मशवरा मोहतरम

पत्थरों के नगर से निकालें मुझे
लौट आएगी मेरी सदा मोहतरम

पाँव मेरे ज़मीं पर ये टिकते न थे
नाम के साथ लिक्खा गया मोहतरम

ख़ुद-शनासी की मंज़िल हमें जब मिली
खुल गया हम पे बाब-ए-फ़ना मोहतरम