उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bhini bhini KHushbu jaise log kahan hain

भीनी भीनी ख़ुशबू जैसे लोग कहाँ हैं

بھینی بھینی خوشبو جیسے لوگ کہاں ہیں

शायर: Yasir Raza Asif6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

भीनी भीनी ख़ुशबू जैसे लोग कहाँ हैं
बुल्ले शाह और बाहू जैसे लोग कहाँ हैं

हर जानिब ही तारीकी और मायूसी है
जगमग करते जुगनू जैसे लोग कहाँ हैं

हम से आज ग़ज़ाली आँखें रूठ चुकी हैं
जाने अब वो आहू जैसे लोग कहाँ हैं

जिन का लहजा आज रिवायत कहलाता है
नस्ता'लीक़ से उर्दू जैसे लोग कहाँ हैं

वो शीरीनी लफ़्ज़ों का वो सेहर कहाँ है
कोह-ए-क़ाफ़ से जादू जैसे लोग कहाँ हैं

मस्तानों की बस्ती 'आसिफ़' उजड़ चुकी है
मस्त क़लंदर माधो जैसे लोग कहाँ हैं