उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dhaDkanon ki sab kahani KHatm-shud

धड़कनों की सब कहानी ख़त्म-शुद

دھڑکنوں کی سب کہانی ختم شد

शायर: Yasir Raza Asif7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

धड़कनों की सब कहानी ख़त्म-शुद
मेरी आँखों का भी पानी ख़त्म-शुद

मय नई लाओ दुकान-ए-हिज्र से
जो पड़ी थी कुछ पुरानी ख़त्म-शुद

ये रही वो झील जिस की खोज थी
पंछियो नक़्ल-ए-मकानी ख़त्म-शुद

बर्फ़ ने सर पर बसेरा कर लिया
अब जवानी की कहानी ख़त्म-शुद

शहर-ए-दिल की रौनक़ें सब खो गईं
हर तरह की शादमानी ख़त्म-शुद

उँगलियों के बोलने से ये हुआ
सब पयाम-ए-मुँह-ज़बानी ख़त्म-शुद

चल के 'आसिफ़' पूछते हैं वक़्त से
कब ये होगी राएगानी ख़त्म-शुद