उर्दू शायरी · ग़ज़ल

usko jin aankhon se duniya dikhti hai

उस को जिन आँखों से दुनिया दिखती है

اس کو جن آنکھوں سے دنیا دکھتی ہے

शायर: Gaurav Trivedi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उस को जिन आँखों से दुनिया दिखती है
मैं ने उन आँखों में दुनिया देखी है

जिस को मेरा हाथ पकड़ना चाहिए था
वो मेरी इक ग़लती पकड़े बैठी है

आँख से निकली तब मुझ को मा'लूम हुआ
ख़्वाब की अर्थी पानी जैसी होती है

सन नव्वे में वो दुनिया में आई थी
सन नव्वे से शाम ये बहकी बहकी है

वो कहती थी मर जाएगी मेरे बिन
कोई तो बतलाओ अब वो कैसी है