उर्दू शायरी · ग़ज़ल

usko barson baad tanha jaane main kaisa laga

उस को बरसों बा'द तन्हा जाने मैं कैसा लगा

اس کو برسوں بعد تنہا جانے میں کیسا لگا

शायर: R P Shokh5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उस को बरसों बा'द तन्हा जाने मैं कैसा लगा
मुझ को तो वो अजनबी के साथ भी अच्छा लगा

एक मुद्दत से न देखा था उठा कर उस का ग़म
उस का ग़म भी गर्द में लिपटा हुआ तोहफ़ा लगा

थी लिखाई भी उसी की दस्तख़त भी उस के थे
क्यूँ ख़त-ए-तर्क-ए-तअ'ल्लुक़ ग़ैर का लिक्खा लगा

साहिलों पर बन सका उस से न कुछ रिश्ता मगर
उस ने छोड़ा जब भँवर में वो मुझे अपना लगा

मैं कि मेरे उम्र गुज़री इंकिसार-ओ-इज्ज़ में
कुछ मशीनों को ख़ता करता हुआ बच्चा लगा