उर्दू शायरी · ग़ज़ल

uski aankhon mein koi KHwab nahin

उस की आँखों में कोई ख़्वाब नहीं

اس کی آنکھوں میں کوئی خواب نہیں

शायर: M. S. Mahawar9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उस की आँखों में कोई ख़्वाब नहीं
क्या पियाले में ही शराब नहीं

फूल तो और भी हैं लेकिन दोस्त
उस के जैसा कोई गुलाब नहीं

हाल सूखे दरख़्त से पूछो
अपना साया भी दस्तियाब नहीं

पहले बोसे में इश्क़ फीका लगा
आख़िरी का कोई जवाब नहीं

हिज्र की आग से बचा न कोई
अश्क ही अश्क है बस आब नहीं

वस्ल के दिन गिने हैं उँगली पर
हिज्र का कोई भी हिसाब नहीं

तू नहीं याद भी नहीं तेरी
दश्त-ए-दिल में कोई सराब नहीं

देख जिस को हो जाते थे पागल
सामने है अब इज़्तिराब नहीं

है अदब जानना तबीअ'त भी
हाल पूछा है बाज़याब नहीं