उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek nazar aar-par kar dekhen

इक नज़र आर-पार कर देखें

اک نظر آر پار کر دیکھیں

शायर: M. S. Mahawar11 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इक नज़र आर-पार कर देखें
रूह को जिस्म उतार कर देखें

कौन सुनता है ख़ामुशी की सदा
आँखों से भी पुकार कर देखें

खेल ये सीधी नज़रों का नहीं दोस्त
क्यूँ न आँख एक मार कर देखें

प्यार अगर दे मज़ा उदासी का
क्यूँ न हम दिल ये हार कर देखें

हिज्र के बा'द एक और ये हिज्र
दश्त में प्यास मार कर देखें

आँसुओं में छुपा हो राज़ कोई
क्यूँ न वो दरिया पार कर देखें

है कोई और अक्स आइने में
धूल थोड़ी उतार कर देखें

हो अकेला उदास सच भी कहीं
दुनिया को दरकिनार कर देखें

शौक़ टकराने का हो तूफ़ाँ से
ज़ुल्फ़-ए-जानाँ सँवार कर देखें

हर शजर को गले लगाते चल
अक्स-ए-ख़ुशबू-ए-यार कर देखें

हो कोई हाल क़ैस जैसा फिर
दिल की बात आश्कार कर देखें