उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jis ki chahat mein gum-shuda hun main

जिस की चाहत में गुम-शुदा हूँ मैं

جس کی چاہت میں گمشدہ ہوں میں

शायर: M. S. Mahawar7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जिस की चाहत में गुम-शुदा हूँ मैं
वो समझती है बेवफ़ा हूँ मैं

देख कर के पलट गया तू मुझे
तेरे दिल का ही रास्ता हूँ मैं

बैठते हैं रक़ीब मेरे पास
हिज्र की कारगर दवा हूँ मैं

आइने में नहीं मिलेगा तू
ढूँढ मुझ को तिरा पता हूँ मैं

गर मोहब्बत गुनाह है तो फिर
ठीक कहते हैं सब बुरा हूँ मैं

तू ने इक चीख़ ही सुनी है बस
सुन ख़मोशी भी अन-सुना हूँ मैं

तू मुझे सोचता नहीं होगा
सोच कर के ये मर गया हूँ मैं